दुनिया का सबसे रहस्यमय कोरोना केस – Most Mysterious Case of Corona Virus

Most Mysterious Case of Corona Virus

Most Mysterious Case of Corona Virus: “कोरोना”, यह शब्द जैसे ही सामने आता है वैसे ही मन में भय जन्म ले लेता है। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि सम्पूर्ण विश्व को अचानक ऐसी महामारी का सामना करना पड़ेगा जिसका कोई इलाज़ ही नहीं है। यह बिमारी अब तक पूरे विश्व में न सिर्फ लाखों लोगों का जीवन लील चुकी बल्कि उसने न जाने कितने ही परिवार, कितने ही व्यापारिक संसथान बर्बाद कर दिए हैं। पूरे विश्व की अर्थव्यस्था पूरी तरह से चरमरा गयी है। और इतना कुछ हो जाने के बाद भी यह नहीं पता की इस बीमारी से छुटकारा कब मिलेगा।

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जिस विज्ञान को खुद पर बहुत गर्व था, उसको इस बीमारी ने घुटने टिकवा दिए हैं। आज भी वैज्ञानिक इस वायरस को समझने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जितना वो अभी तक जान पाए हैं वो नाकाफी है। और ऐसा इसलिए हैं क्यूँकि जब भी विज्ञान ये दावा करता है कि उसने इसको समझ लिया है तभी ऐसा कोई घटना सामने आजाती है जो वैज्ञानिकों के कोरोना को समझ लेने के दावे को धत्ता साबित कर देती है, और ऐसा ही इस रहस्यमय घटना ने किया है जिसका जिक्र हम आपके सामने करने जा रहे हैं। तो आइये जानते हैं “दुनिया का सबसे रहस्यमय कोरोना केस – Most Mysterious Case of Corona Virus” के बारे में जिसने वैज्ञानिकों को अपने कोरोना पर ज्ञान पर फिर से एक बार सोचने को बाध्य कर दिया है।

दुनिया का सबसे रहस्यमय कोरोना केस – Most Mysterious Case of Corona Virus

ये घटना है दक्षिण अर्जेंटीना के शहर उशुआइया की, जिसे पृथ्वी की दक्षिणी दिशा का अंतिम शहर भी माना जाता है। पृथ्वी के दक्षिण दिशा के इस अंतिम शहर के बाद सिर्फ समुद्र है और कुछ भी नहीं, और यही कारण है कि यह शहर मत्स्य उद्योग का एक बड़ा केंद्र है। यहाँ से अनेकों बड़े छोटे समुद्री जहाज़ मछली पकड़ने के लिए लम्बी लम्बी यात्राओं पर निकलते हैं। ऐसे ही एक जहाज़ का नाम है “द इशीजन मारु” , जो की 6 जून 2020 को 61 क्रू सदस्यों के साथ मछली पकड़ने निकला। यह यात्रा करीब 45 दिन लम्बी होनी थी, लेकिन करीब 35 दिन बाद ही इस जहाज को वापस लौटना पड़ा क्यूंकि इसमें सवार क्रू सदस्यों की तबियत अचानक बिगड़ने लगी।

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वापस आने के बाद जहाज़ पर मौजूद सभी सदस्यों की चिकत्सीय जाँच की गयी जिसमें 61 में से 57 सदस्यों को कोरोना संक्रमित पाया गया। यह खबर तेज़ी पूरे शहर में फैली और धीरे धीरे कर के कई प्रमुख अख़बारों की सुर्खियाँ बन गयी। अब आप सोच रहे होंगे की इसमें ऐसा क्या था कि इसने सब जगह सनसनी फैला दी। ऐसा इसलिए, क्यूंकि इस जहाज़ की यात्रा शुरू होने से पहले सभी क्रू सदस्यों का कोरोना टेस्ट हुआ था, जिसमें सभी की रिपोर्ट नकारात्मक आयी थी यानी की कोई कोरोना संक्रमित नहीं था। और तो और उसके बाद इस जहाज़ के सभी क्रू सदस्यों को एक होटल में यात्रा शुरू होने से पहले 14 दिन के लिए क्वारंटाइन किया गया था, जो की समुद्री यात्रा में जाने से पूर्व पालन किया जाना वाला नियमित प्रोटोकॉल था।

जहाज़ पर लादे जाने वाले सामान की भी पूरी जाँच की गयी और उसको पूरी तरह से डिसइंफेक्ट (कीटाणुरहित) किया गया था, यहाँ तक की जहाज़ पर मौजूद सभी उपकरण कर यंत्रों को भी डिसइंफेक्ट किया गया था। इस घटना की जाँच कर रहे लोगों का कहना है कि यात्रा प्रारम्भ होने के बाद ये जहाज़ कहीं नहीं रुका, न ही इसपर कोई बाहरी आदमी चड़ा और न ही किसी और जहाज़ के संपर्क में यह जहाज़ आया, यहाँ तक की कोई भी क्रू सदस्य इस जहाज़ से कहीं भी नीचे नहीं उतरा और न ही इसपर मौजूद क्रू सदस्य किसी बाहरी चीज़ के संपर्क में आये, तो प्रश्न यह उठता है कि फिर कैसे इन सदस्यों को कोरोना संक्रमण हुआ।

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यह एक ऐसी घटना बन गयी है जिसकी जाँच कर रहे डॉक्टर्स को भी कुछ समझ नहीं पा रहे हैं, वो अलग अलग सिद्धांतों के द्वारा इसको हल करने का प्रयास कर रहे हैं। फिर भी अगर हम यह मान लें की जो कोरोना जाँच हुई उसमें किसी तरह की कोई गलती हुई होगी, तो भी अगर अभी तक प्राप्त एवं मान्य जानकरियों और विभिन्न्न संस्थाओं जैसे WHO, American center for disease control and prevention और European Public health association जैसे संगठनों के अनुसार किसी व्यक्ति के कोरोना के संपर्क में आने के बाद उसके लक्षणों को उस व्यक्ति में परिलक्षित होने में 2 दिन से लेकर 14 दिन तक का समय लगता है, ऐसे में सभी क्रू सदस्यों को यात्रा शुरू होने से पहले 14 दिन के लिए क्वारंटाइन किया गया था। तो अगर जाँच में किसी प्रकार की गलती होती तो इनमें कोरोना के लक्षण पहले ही दिख जाने चाहिए थे, लेकिन यात्रा शुरू होने के कई हफ़्तों बाद भी किसी में कोरोना के लक्षण नहीं पाए गए। यानी की जाँच में किसी भी प्रकार की कोई गलती नहीं थी और अगर ऐसा होता तो क्रू सदस्यों में कोरोना के लक्षण बहुत पहले आगये होते।

एक दूसरी सम्भावना यह व्यक्त की जा रही है कि जहाज़ पर मौजूद सामान के द्वारा कोरोना वायरस ने क्रू सदस्यों को संक्रमित किया हो पर क्रू सदस्यों और जहाज़ का मालिकाना हक़ रखने वाली एजेंसी का कहना है कि उसने क्रू सदस्यों के कोरोना टेस्ट होने से पूर्व हो जहाज़ को डिसइंफेक्ट कर के जहाज़ पर सामान को लादा गया था। अभी तक जो मानक तथ्य हैं उसके मुताबिक़ कोरोना वायरस अलग अलग सतह पर अलग समय तक ही जीवित रह सकता है पर यह समय बहुत ही सीमित है ऐसे में यह संभावना भी सही नहीं हो सकती।

अबतक कई तरह जी परिकल्पनाओं के माध्यम से इसको सुलझाने का प्रयास किया गया है पर हर सिद्धांत एक सीमा पर आकर निरुत्तर हो जाता है। इस घटना की जाँच करने वालों ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं, उनका कहना है कि उनको नहीं पता की क्रू सदस्यों को कोरोना कैसे हुआ है। फिहाल जितनी भी जानकारी कोरोना वायरस के विषय में उपलब्ध है उसके द्वारा इसको सुलझाना संभव प्रतीत नहीं हो रहा। ऐसे में चिकित्सीय विज्ञान द्वारा इस घटना को न सुलझा पाना यह दर्शाता है कि अभी भी हमारे शोधकर्ता इस वायरस के विषय में सब कुछ नहीं जानते हैं।

एक तरफ हमारे वैज्ञानिक जल्द जल्द से इस वायरस की वैक्सीन बाजार में लाने को आतुर हैं वहीँ दूसरी और “द इशीजन मारु” जहाज़ की घटना हमें यह सोचने को बाध्य कर देती है कि अभी भी हमारे वैज्ञानिक इस जानलेवा वायरस के विषय में सब कुछ नहीं जानते हैं और उन्हें इसकी और गहरायी से जाँच करने की आवश्यकता है। कहीं ऐसा न हो इस वायरस की वैक्सीन को जल्द से बाजार में उतारने की जल्दी में हम किसी नयी समस्या को जन्म न दे दें। “दुनिया का सबसे रहस्यमय कोरोना केस – Most Mysterious Case of Corona Virus” के विषय में आपकी क्या सोच है, अवश्य कमेंट्स में लिखें।

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