चीन के 3000 सैनिक रातों रात हुए गायब! – जानें क्या है पूरा मामला

चीन के 3000 सैनिक रातों रात हुए गायब

चीन के 3000 सैनिक रातों रात हुए गायब: आप यही सोच रहे होंगे न कि ऐसा कैसे हो सकता है, भला इतने बड़े और शक्तिशाली देश चीन के 3000 सैनिक रातों रात ऐसे कैसे गायब हो सकते हैं? और अगर हुए भी तो यह खबर कहीं पर भी मौजूद क्यों नहीं? कहीं यह झूठ तो नहीं? यह असंभव है, ऐसा हो ही नहीं सकता। ऐसे ही कई प्रश्न आपके मन में इस शीर्षक की ,चीन के 3000 सैनिक रातों रात हुए गायब!, को पढ़ कर आरहे होंग, अगर ऐसा है तो आप अकेले नहीं हैं। हमने भी जब इस शीर्षक को पढ़ा था तो यही सब प्रश्न हमारे मन में आये थे। और जब पूरी घटना का अध्यन किया तो पाया कि यह सत्य है। तो आइये जानते हैं इस शीर्षक, “चीन के 3000 सैनिक रातों रात हुए गायब!” का पूरा सत्य।

चीन के 3000 सैनिक रातों रात हुए गायब!

आपने आज तक बहुत सी ऐसी घटनाओं के विषय में पढ़ा होगा जहाँ एक या दो लोग या इससे कुछ ही अधिक लोगों के रहस्य्मय रूप से गायब हुए हों पर निश्चित ही ऐसा कभी नहीं पढ़ा होगा की एक साथ 3000 लोग गायब हो जाएँ और वो भी कोई साधारण लोग नहीं अपितु एक राष्ट्र की सेना के 3000 सिपाही। और सबसे बड़ी बात की वो 3000 सिपाही कहाँ गए, उनके साथ क्या हुआ, इतने सिपाहियों को एक साथ किसने गायब किया? इसका उत्तर आजतक नहीं मिला। यह अबतक के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है।

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यह घटना है सन 1937 की, जब चीन और जापान के बीच में द्वितीय विध्वंसक युद्ध चल रहा था जो की चीन के लिए बहुत ही प्रलयंकारी सिद्ध हो रहा था। इस युद्ध में चीनी सेना हर मोर्चे पर जापान की सेना से मुँह की कहानी पड़ रही थी। जापान की सेना बहुत तीव्र गति से चीन के अंदर प्रवेश कर रही थी, उसने चीन के कई बड़े प्रदेशों पर नियंत्रण कर लिया था। उस समय की अगर हम चीनी सेना की शक्ति की बात करें तो वो आज की तुलना में कहीं भी नहीं ठहरती थी। न तो वो आज के सामान ही प्रशिक्षित थी और न ही उसके पास अत्याधुनिक हथियार थे। कुल मिला कर अगर कहा जाए तो वो जापान की शक्तिशाली सेना के आगे कहीं नहीं ठहरती थी। जापान की सेना उस समय के हिसाब से बेहद प्रशिक्षित और उस समय चीन की तुलना में कहीं अधिक आधुनिक हथियारों से सुसज्जित थी।

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जापानी सेना बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रही थी और जल्द ही वो उस समय की चीनी राजधानी को अपने नियंत्रण में लेने से बस कुछ दूर थी। चीन किसी भी हालत में अपनी राजधानी को बचाना चाहता था और इसके लिए उसने कर्नल ली फु शिआन को नानजिंग प्रान्त की पहाड़ियों की रक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी, जो की लगभग 3.2 किलोमीटर का क्षेत्र था। नानजिंग प्रान्त को चीन के पश्चिमी भाग से जुड़ने के लिए यांग्त्सी नदी पर बना एक पल ही एकमात्र रास्ता था।

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कर्नल ली फु शिआन ने योजना बनायीं की अगर किसी तरह से इस पल की रक्षा कर ली जाए तो जापानी सेना को आगे बड़ने से रोका जा सकता है, क्यूंकि नानजिंग प्रान्त में घुसने के लिए यह पल ही एकमात्र रास्ता था। इस काम के लिए कर्नल ली फु शिआन को 2988 लोगों की सेना की टुकड़ी दी गयी, जो की बिलकुल नए थे और अधिक प्रशिक्षित भी नहीं थे। लेकिन कर्नल ली के पास और कोई विकल्प भी नहीं था, उन्हें इसी सेना की टुकड़ी से अपना काम निकालना था।

चीन के 3000 सैनिक रातों रात हुए गायब!

10 दिसंबर की दोपहर को इस पूरी टुकड़ी को उनके स्थान पर तैनात कर दिया जहाँ उनकी जिम्मेदारी पल की रक्षा करने की थी। लेकिन अगली सुबह कर्नल ली को सूचना मिली की उनका 2988 सैनिकों की टुकड़ी से संपर्क टूट चूका है और वहाँ से किसी भी प्रकार की सूचना नहीं आरही है। बेस पर मौजूद सभी लोगों को लगा की जरूर उनकी टुकड़ी जापानी सेना के हाथों किसी अनहोनी का शिकार हो गयी है। कर्नल ली ने तुरंत ही एक टीम को पूरी घटना की जानकारी लेने के लिए भेजा।

लेकिन जब वो टीम वहाँ पहुँची तो वो सन्न रह गयी क्यूंकि उनके द्वारा भेजी गयी टुकड़ी का एक भी जवान पल की सुरक्षा में मौजूद नहीं था। उन सैनिकों के साथ भेजा गया हथियार और उससे जुड़ा साजो सामान वैसे का वैसा ही पड़ा था, ऐसा साफ़ प्रतीत हो रहा था कि उनको वाहनों से उतारने के बाद छुआ भी नहीं गया है। लेकिन अभी भी वहाँ पर कुछ टेंट गड़े हुए थे और आग अभी सुलग रही थी। भेजी गयी 2988 सैनिकों की टुकड़ी के साथ खाने की सामग्री भी भेजी गयी थी पर वो भी वैसी की वैसी पड़ी थी कुछ पैकेट्स को छोड़ दें तो किसी ने उनको खोला तक नहीं था।

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उस जगह को देख कर यह साफ़ पता चल रहा था कि कुछ समय पूर्व तक वहाँ पर सैनिक मौजूद थे, तो फिर अचानक सभी सैनिक कहाँ गायब हो गए। लेकिन एक बात और भी चौंकाने वाली थी की वहाँ की स्थिति से यह भी स्पष्ट हो रहा था कि वहाँ पर किसी भी तरह की कोई मुठभेड़ नहीं हुई थी, यानी की भेजी गयी टुकड़ी का जापानी सेना से कोई आमना सामना हुआ था। तो आखिर 2988 लोगों की पूरी टुकड़ी रातों रात कहाँ गायब हो गयी, यह प्रश्न वहाँ मौजूद हर इंसान को परेशान कर रहा था और साथ ही एक अंजाना सा भय भी।

उसी पोस्ट के आसपास चीनी सेना की और भी कई पोस्ट थी, जिससे पूछताछ से यह पता चला की बीती रात वहाँ से किसी भी प्रकार की हलचल, या गोलीबारी की आवाज़ नहीं सुनाई दी थी और न ही जापानी सेना द्वारा किसी भी प्रकार का हमला पुल वाली पोस्ट या उसके पास के किसी और इलाके में किया गया। इस पोस्ट के तरफ नदी थी तो दूसरी और झाड़ियाँ और खेत थे, जहाँ आसपास के किसानों की फसल थी। लेकिन जब इन झाड़ियों और खेतों की जाँच की गयी तो किसी भी तरह के वहाँ पर पैरों के निशान नहीं मिले, तो फिर ये 2988 सैनिक गए कहाँ?

यह सवाल अब एक रहस्य का रूप ले चूका था। चीनी सेना द्वारा आसपास के सभी गाँवों की छानबीन की गयी यहाँ तक की उन 2988 सैनिकों के घर तक में पूछताछ की गयी पर कोई भी सुराग नहीं मिला। सन 1945 में चीन और जापान के बीच युद्ध समाप्त हुआ और 1949 में दोनों के बीच विवादित भूमि पर संधि भी हो गयी। उसके बाद जापानी सरकार द्वारा युद्ध से जुड़े दस्तावेज़ साँझा करते वक्त यह बात स्पष्ट की कि उनकी सेना ने कभी उस इलाके पर आक्रमण नहीं किया और न ही उन्होंने उन 2988 सैनिकों को बंधक बनाया था।

इस घटना के इतने वर्ष बाद भी चीनी सरकार उन 2988 सैनिकों का सुराग ढूँढ रही है पर उसके हाथ आज भी खाली हैं। आखिर क्या हुआ उन सैनिकों के साथ, क्यों उनका कोई अता पता नहीं मिला, आखिर उस रात क्या हुआ, उनको जमीन खा गयी या आसमान निगल गया, यह आज भी रहस्य बना हुआ है। क्या ऐसी कोई घटना हुई भी थी या धोखेभाज चीन का कोई प्रोपेगंडा, यह बात कोई नहीं जानता। पर कुछ मत हैं, इस घटना से जुड़े हुए, आइये एक बार उनको भी जान लेते हैं।

संभावित कारण या उत्तर

कुछ लोगों का मानना है कि, हो सकता है कि उन 2988 सैनिकों ने जापानी सेना के आगे आत्मसमर्पण कर दिया हो पर ऐसा लगता नहीं है कि वो ऐसा करेंगे क्यूंकि उस वक्त की जापानी सेना बहुत ही क्रूर मानी जाती थी और चीन की पूरी सेना यह बात जानती थी कि अगर वो जापानी सेना के हाथ लगे तो वो उनके साथ कितना भयावह सुलूक करेंगे, इसलिए ऐसा हो नहीं सकता।

दूसरा मत यह कहा जाता है कि हो सकता हो कि युद्ध की विभिषीका से बचने के लिए उन 2988 सैनिकों ने भाग लेना ही उचित समझा हो, और वैसे भी चीन के वामपंथी शासन की ज्यादतियाँ भी कुछ कम न थी। पर ऐसा होने की सम्भावना नज़र नहीं आती, क्यूंकि 3000 सैनिक एक साथ भागें और जंगल हो या खेत कहीं पर भी उनके पैरों के निशान न मिले यह कैसे संभव है और इतनी बड़ी तादाद में सेना भागे और किसी ने न देखा हो यह कैसे हो सकता था। इतनी बड़ी फौज अगर भागेगी तो कुछ तो हथियार अपने खुद की सुरक्षा के लिए लेकर जाएगी, क्यूंकि युद्ध उस वक्त अपने चरम पर था, और साथ ही भोजन भी छोड़ कर जाना कुछ समझ नहीं आता।

तीसरा मत यह कहता है कि हो सकता है की चीन ने ये सब झूठ बोला हो, जापानी सेना के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए और ऐसी कोई घटना कभी घाटी ही न हो। पर ऐसा करने से उसको कोई विशेष लाभ होता दिख नहीं रहा। इसलिए इस मत को भी हज़म करना आसान नहीं है।

या फिर सभी सैनिकों का एलियंस ने अपहरण कर लिया हो, जो कि सबसे अब तक का सबसे बड़ा अपहरण हो। पर यह सब बस theories हैं इनका कोई आधार नहीं है और जब तक सत्य सामने नहीं आता तब तक ऐसी ही अटकलें लगती रहेंगी। पर अगर इस घटना के शब्द शब्द को सत्य माना जाए तो यह वाकई एक बहुत बड़ा रहस्य है, जिसका कोई जवाब किसी के पास नहीं है और शायद ही इसका उत्तर कभी मिल सके।

आपको क्या लगता है, क्या ये घटना झूठी है और चीनी सरकार द्वारा किसी प्रकार का प्रोपेगंडा है या आप भी यह मानते हैं कि उन 3000 सैनिकों का एलियंस ने अपहरण कर लिया है। या आपका मत इन सबसे भिन्न है, कृपया कमेंट के माध्यम से जरूर साँझा कीजियेगा कि आपके मत में चीन के 3000 सैनिक रातों रात हुए कहाँ गायब हो गए?

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